Digital Chowk

Last updated: 29-06-2020 10:50:29 AM

  • भारत और चीन के रिश्ते इस वक़्त उस चौराहे पर आ कर खड़े हो चुके हैं, जहाँ से एक ही चीज दिखाई देती है और वो हैं युद्ध। वैसे तो आपको पता ही होगा कि इन दोनों देशों के बीच 1962, 1965 और 1975 में जंग हो चुकी हैं। 1962 की जंग में चीन की जीत हुई थी और 1965 और 1975 में जो जंग हुई उसमे किसी की जीत तो नहीं हुई पर उनकी लड़ाई काफी हिंसक थी। वहीँ अबकी बार कुछ होता है तो यह चौथी जंग होगी। वैसे तो जंग के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता हैं लेकिन भारत और चीन सीमा पर स्थिति अभी तनावपूर्ण है। भारत और चीनी सेना लगभग 2 महीने से पूर्वी लद्दाख के विवादित क्षेत्र के पास अपनी पकड़ को मजबूत करने में लगे हुए हैं। जिसके वजह से 15 और 16 जून की रात गलवान घाटी में इस तरह की वारदात को अंजाम दिया गया। बता दे कि दोनों ही देश गलवान के अपने सैन्य अड्डों पर खतरनाक हथियार, तोप व युद्धक वाहनों को पहुंचाने में लगे हुए हैं। वैसे दोनों देशों द्वारा सैन्य व कूटनीतिक निति द्वारा भी मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत और चीन एशिया की दो महाशक्तियां मानी जातीं हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन दोनों देशों में ज्यादा शक्तिशाली कौन है? अगर गलवान घाटी पर भारत और चीन के बीच लड़ाई हुई तो किसकी जय और किसकी पराजय होगी। क्या आज का भारत वही भारत है जिसको चीन ने 1962 के युद्ध में बुरी तरह से हरा दिया था या फिर आज का भारत इतना शक्तिशाली हो चुका है कि चीन इसके साथ लड़ाई का ख्याल भी अपने दिमाग में नही लायेगा। 
    आपको बता दे कि लड़ाई लड़ने के लिए जितना हथियार मायने रखती हैं उतने ही आपका शारारिक बल। चीनी सेना में मंगोल सैनिक हैं, जो दुनिया के सबसे क्रूर और खूंखार सैनिक होते हैं। बता दे कि भारत के ऊपर जब नादिरशाह और चंगेश खान ने आक्रमण किया था तो उनकी मुख्य ताकत उनकी सेना के मंगोल सैनिक ही थे। वहीँ अगर भारतीय सैनिकों की बात करे तो यह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में गिना जाता है। 
    अब आती हैं दोनों देशों की ताकत की बात, तो भारतीय नौसेना के पास 1 युद्धपोत यानि Aircraft, 18 विमान वाहक युद्धपोत, 15 लड़ाकू युद्धपोत, 10 विध्वंसक युद्धपोत यानि Destroyer, 20 छोटे जंगी जहाज़, 14 पनडुब्बियां, 135 गस्ती युद्धपोत यानि Patrol Craft, 295 समुद्री बेड़े, INS विक्रमादित्य युद्धपोत, INS चक्र-2 मिराज-2000, मिग-29, C-17 ग्लोबमास्टर, 35 फाइटर स्क्वाड्रन, सुखोई-30, C-130J सुपर हरक्यूलिस, राफेल जेट जो कि दुनियां का नक्सा बदलने के लिए काफी हैं। 
    वहीँ अगर चीन की बात करे तो इनके पास भी कई दुनियां के सबसे खतरनाक मिसाइल हैं जो कि भारत के लिए काफी हैं। उसमे से 1 हाइपरसॉनिक एयरक्राफ़्ट, 48 विमान वाहक Aircraft, 51 लड़ाकू युद्धपोत, 35 विध्वंसक युद्धपोत, 35 छोटे जंगी जहाज़, 68 पनडुब्बियां, 220 गस्ती युद्धपोत, 714 समुद्री बेड़े आदि सब हैं। वहीँ चीन के पास पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स हैं जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वायुसेना है। पहली सबसे बड़ी वायुसेना अमेरिका की हैं। चीन के पास S-300 है जो जमीन से हवा में मार करने वाली घातक मिसाइल है।
    अभी के ताज़ा हालात को देखते हुए भारत ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल में 34,000 सैनिकों को तैनात किया हैं जबकि चीन ने 40,000 सैनिकों को। वैसे भारत के पास कुल एक्टिव सेना 13.25 लाख है. इसके विपरीत चीन की कुल आर्मी 23.35 लाख है। 
     
    वहीँ अगर चीन और भारत के बीच गलवान घाटी पर युद्ध होती है तो भारत का हाल 1962 की लड़ाई से भी बुरा होगा। ऐसा हम इस लिए कह रहे हैं क्योकि भारत जहाँ गलवान पर  34 ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट तैनात किये हैं वहीँ चीन ने 101 फाइटर एयरक्राफ्ट। वहीँ भारत की रक्षा बजट 60 अरब डॉलर का हैं जबकि चीन की रक्षा बजट 179 अरब डॉलर, जो की भारत के मुलाबले तीन गुना अधिक हैं। वहीँ चीन ने अपने सबसे खतरनाक मिसाइलों को गलवान पर तैनात कर रहा हैं। चीन ने जमीन ही नहीं सोशल मीडिया में भी जंग छेड़ रखा है। इसके लिए चीन ने अपनी 'मिसाइल' ग्‍लोबल टाइम्‍स (Global Times) को मोर्चे पर लगा दिया है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने पिछले एक महीने में सैकड़ों ट्वीट करके न केवल भारत के खिलाफ बल्कि अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और ताइवान के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रखा है। दरअसल, चीन की बिना गोली चलाए ही युद्ध को जीतने की रणनीति रही है। इस रणनीति को अमल में लाने का काम चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स को दिया गया है। लद्दाख में तनाव के बाद चीन की प्रोपेगेंडा मशीन ग्‍लोबल ने भारत के खिलाफ एक तरीके से मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया है।
    भारत-चीन तनाव शुरू होने के बाद पिछले एक महीने में ग्‍लोबल टाइम्‍स ने दर्जनों की संख्‍या में ऐसी खबरें लिखी हैं और वीडियो जारी किए हैं जिससे चीन की ताकत को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाए और भारत को कमजोर साबित किया जाए। ग्‍लोबल टाइम्‍स पहले चीन सरकार के दावे को व‍िशेषज्ञ के हवाले से कहता है और फिर सरकार भी उसको दोहराती है। एक तरीके से चीन सरकार अप्रत्‍यक्ष तरीके से अपने दावे को ग्‍लोबल टाइम्‍स के माध्‍यम से प्‍लांट कराती है और फिर खुद उसका समर्थन करती है।
    इस उदाहरण गलवान घाटी है। सीमा विवाद शुरू होने के बाद ग्‍लोबल टाइम्‍स ने सबसे पहले दावा क‍िया क‍ि भारत के नियंत्रण वाली गलवान वैली चीन की है। गलवान घाटी चीन का इलाका है और भारत जानबूझकर वहां विवाद पैदा कर रहा है। भारत गलवान में चीन के इलाके में अवैध तरीके से डिफेंस फैसिलिटीज का निर्माण कर रहा है। इस कारण चीन की सेना के पास इसका जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं है। इसके बाद से चीन सरकार अब लगातार दावा कर रही है कि यह इलाका उसका है। इसी गलवान वैली में भारत और चीन के बीच सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए।
     
    वहीँ एक कडवी सच्चाई यह है कि दोनों देश पूरे विश्व के 2 चमकते हुए सितारे हैं इन दोनों की अर्थव्यवस्था पर भी कहैं न कहीं विश्व की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है। इसलिए विश्व के अन्य विकसित देश इन दोनों देशों के बीच युद्ध की किसी भी संभावना को ख़त्म करने में कोई कसर नही छोड़ रहे जो कि विश्व में शांति और विकास के लिए सबसे जरूरी है।